[दीवान]hai panchnad! haa panipat!!
आलोक कुमार
alok at devanaagarii.net
Thu Nov 1 13:12:01 IST 2007
लेख दिलचस्प है।
पर उससे भी ज़्यादा दिलचस्प मुझे लगा वह फॉण्ट जिसमें वह पीडीएफ़ लिखी गई
है। वही जनसत्ता वाला फॉण्ट है न? क्या कोई बता सकता है कि यह पीडीएफ़
बना कैसे है?
आलोक
2007/11/1, Ravikant <ravikant at sarai.net>:
> साथियो,
>
> हाल ही में हिन्दी के एतिहासिक तौर पर अगुआ और कई मायनों में धुरंधर आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल
> की ग्रंथावली का संपादन श्री ओमप्रकाश सिंह ने किया है, अपनी सेहत संबंधी मजबूरियों से लड़ते हुए.
> प्रकाशन संस्थान ने इसे करीने से छापा है. आठों खंडो का मूल्य 6000/= है.
> इसी पर ओम थानवी ने लिखते हुए भाषा-निर्माण विवाद को एक और प्रसंग में उठा दिया है.
> मुझे उनका आलेख पसंद आया, पर ऐसा लगता है कि यह विवाद थोड़ा गरमायेगा. बहरहाल ये पेश है उनके
> लंबे आलेख की पहली खेप कल्पना से. जैसे ही दूसरा नेट पर नज़र आए अविनाश या राजेश या मैं इसकी
> कड़ी दीवान के अभिलेखागार में डाल देंगे. लेख पीडीएफ़ में है.
>
> हाय पंचनद! हा पानीपत!
> http://www.kalpana.it/hindi/lekhan/omthanvi/index.htm
>
>
> मज़े लें. मज़ा अगर नहीं आया तो बताएँ ज़रूर कि क्या कमी है, इसमें, कौन से ऐसे विवाद हिन्दी में
> पहले से हो चुके हैं, क्या नया है, आदि-आदि, ताकि हम सबका बुद्धिविलास हो.
>
> शुक्रिया
>
> रविकान्त
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