[दीवान] alok puranik - bazar bhav reporting/7
Ravikant
ravikant at sarai.net
Thu Nov 29 19:17:17 IST 2007
सातवीं पोस्ट- 1988-1997 की अवधि
यह दौर शेयर बाजार के लिए खासी उथल-पुथल का रहा है। खास तौर पर बाबरी मस्जिद के ढहा दि
ये जाने के बाद महत्वपूर्ण शेयर बाजारों की प्रतिक्रिया की रिपोर्टिंग इस दौर में की गयी। इसके
अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक भी शेयर बाजार में लगातार महत्वपूर्ण इस दौर में हुए। उनके असर
की छाप शेयर बाजार की रिपोर्टिंग पर आने लगी थी।
निवेशकों का समर्थन.......और बंबई के उत्साहजनक समाचार
बंबई के उत्साहजनक समाचारों का रोल बराबर बना हुआ था। बंबई के समाचारों से बाजार सुधर जाया
करता था। देखें-
जनसत्ता दिल्ली 13 नवंबर, 1992 पेज नंबर नौ
निवेशकों के समर्थन से शेयरों में भरपाई का दौर
दिल्ली, 12 नवंबर (एनएनएस)। निवेशकों के समर्थन से आज शेयर बाजार में चुनिंदा शेयरों में भरपाई का
दौर आया। दिल्ली स्टाक एक्सचेंज अधिकारियों द्वारा 24 घंटे में भुगतान करने के निर्देश से भी शेयरों
में सुधार आया। बंबई के भी उत्साहजनक समाचार मिलने से कारोबारियों का मनोबल बढ़ा। सूचकांक भी
11.91 अंक बढ़कर 585.64 अंक पर बंद हुआ।
मंदड़ियों की पटान से आंध्रा सीमेंट, अपोलो टायर, बिंदल एग्रो, डीसीएम, डीसीएम टोयोटा,
श्रीराम इंड, एस्कोर्स्टस, एस्सार शिपिंग, ग्रेसिम, हीरो हौंडा, हिद लीवर, हिंद मोटर, जे के सिं
थेटिक्स, एल एंड टी, एलएमएल, ओरके, रिलायंस, एसआरएफ, टैल्को, टिस्को, यूटीआई में असामान्य से
अच्छा सुधारात्मक रुख रहा। जबकि इसके विपरीत मुनाफा वसूली से इंडो गल्फ, जयप्रकाश, जेसीटी,
केल्वीनेटर, महावीर स्पिनिंग, मालवा काटन, नेस्ले, ओसवाल, श्रीराम इंड इंट में सामान्य से साधा
रण गिरावट का दौर जारी रहा।
बाजार की अंतर्धारणा सुधरी और सुगबुगाहट के माहौल में बंद हुई। कुछ कारोबारियों के विचार में यह
सुधार स्थायी नहीं बताया जाता। ..................
दिल्ली डेटलाइन की खबर में बंबई के समाचारों का महत्व स्पष्ट होता है। बंबई के शेयर बाजार की
महत्ता का अंदाज भी इससे लगता रहता है। शेयर बाजार की रिपोर्टिंग में बंबई शेयर बाजार के
संकेतों को बहुत ही गंभीरता से लिया जाता था।
बाबरी मस्जिद के साथ बाजार नहीं ढहा
इस अवधि की महत्वपूर्ण घटना थी-बाबरी मस्जिद का ढहना। 6 दिसंबर, 1992 को यह घटना घटी।
बाजार ने इस पर अपने हिसाब से प्रतिक्रिया दी।
बाजार के अपने तर्क होते हैं, बाजार का अपना हिसाब, अपनी किताब होती है, जिसमें यह गुणा भाग
करके देख लिया जाता है कि किस घटना का कितना प्रभाव कैसे पड़ेगा।
जनसत्ता 11 दिसंबर, 1992,पेज नंबर आठ, चार कालम की खबर
बिकवालों की पटान शेयरों को ज्यादा नहीं झुकने देगी
दिल्ली-10 दिसंबर (एनएनएस) यद्यपि दिल्ली व कलकत्ता की तरह देश की आर्थिक राजधानी समझी
जाने वाली बंबई के शेयर बाजार में भी इस सप्ताह कारोबार संभव नहीं हो पाया था, परंतु मद्रास
शेयर बाजार का मंदा हवा के रुख का पता दे रहा है। वहां 8 दिसंबर के दिन शेयर बाजार का सूचकां
क 11.64 अंक घटकर 1320.96 अंक रह गया था, जबकि गत सप्ताह तक शेयर बाजारों में वि्तीय
संस्थाओं और तेजड़ियों की लिवाली तथा बिकवालों की पटान से शेयरों में सुधारात्मक रुख बन रहा था।
स्थानीय शेयर बाजार का सूचकांक एक सप्ताह में 564.16 अंक से सुधरकर 607.37 अंक हो गया था
। ...........
बंबई शेयर बाजार का सूचकांक एक सप्ताह में 2486.41 अंक से बढ़कर गत शुक्रवार को 2696.86 हो
गया था। बाद में रिजर्व बैंक द्वारा रुपए का 1.18 प्रतिशत अवमूल्यन करने के निर्णय से कर्ब में
शेयर बाजार और गर्म हो गया था, परंतु गत रविवार को अयोध्या में विवादस्थल ढांचा कारसेवकों
द्वारा ढहाए जाने की गलत हरकतों से शनिवार को कर्ब में आई तेजी धुल गई थी।
..........अगर सरकार ने जन आक्रोश को खत्म करने के लिए शीघ्र कदम उठाए, तो भी स्थिति सा
मान्य होने में आठ दस दिन और लग सकते हैं। उसके बाद क्रिसमस और नए साल की सात आठ दिन की
छुट्टियां होने का समय निकट आ जाएगा, इसलिए यह अनुमान है कि पिछले मंदे में जो सीमा से अधिक
बिकवाली मंदड़ियों ने की थी, वह तेजी पटान करेंगे, कहा जाता है कि ब्लूचिप और फेरा कंपनियों के
बहुत से शेयरों की डिलीवरी वित्तीय संस्थाओं तथा तेजड़ियों द्वारा लिए जाने के बाद मार्केट में चल
शेयर स्टाक की कमी हो गई है। इसके अलावा रुपए के अवमूल्यन के बाद ड्रग और अन्य रुकी हुई नी
तियों की घोषणा होने की आशा है। यह भी उम्मीद है कि सरकार पेट्रोलियम, उर्वरक तथा
खाद्यान्नों पर सबसिडी जारी रखेगी, इसलिए वायदा वर्ग में आंध्र सीमेंट, अपोलो टायर, बिंदल
एग्रो, डीसीएम टोयोटा, जयप्रकाश, एलएंडटी, टिस्को, रिलायंस, ग्रेसिम, मास्टर शेयर आदि में
घटाबढ़ी से सुधार होने की गुंजाईश है। शिपिंग और निर्यात प्रधान कंपनियों, टैक्सटाइल और एग्रो
और फूड प्रोसेसिंग की स्थापित कंपनियों का भविष्य मजबूती का रहेगा। खाद्य तेल में आईटीसी जैसी
कंपनियों के शेयर मजबूत हो सकते हैं, जिनकी निर्यात व्यापार में तगड़ी घुसपैठ है, क्योंकि देश में
आपसी प्रतिस्पर्धा अधिक होने व कारोबार मंदे के कारण नई कंपनियां शायद टिक नहीं पाएंगी। -
बाबरी मस्जिद ढहने के बाद के घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद तक बंबई और दिल्ली स्टाक बाजारों में
कारोबार नहीं हो पाया था। बंबई और दिल्ली स्टाक बाजारों में कारोबार शुरु हो, इससे पहले
मद्रास स्टाक एक्सचेंज में कारोबार हुआ। वहां के संकेतों के हिसाब से बाजार में कोई ताबड़तोड़ गिरा
वट नहीं देखी गयी। अन्य कारकों के चलते यह उम्मीद की जा रही थी कि बाजार में बहुत कमजोरी
नहीं आयेगी। सो बाजार बहुत ज्यादा नहीं टूटा।
अयोध्याकांड के बाद का उतार-चढ़ाव
इस पूरे प्रकरण में साफ हुआ कि बाजार ने पूरा हिसाब-किताब लगाकर यह पाया है कि नकारात्मक
वजहों को इतना महत्वपूर्ण नहीं माना जाना चाहिए कि बाजार बहुत नीचे गिर जाये। इस सूरत में
कई शेयरों के भाव ऊपर गये।
जनसत्ता 16 दिसंबर, 1992, पेज नंबर नौ, तीन कालम का शीर्षक
बंबई में एसीसी और नोसिल समेत कई शेयर उठे
बंबई 15 दिसंबर (वार्ता)। बंबई शेयर बाजारों में आज राजनीतिक स्थिति में अनिश्चितता बने रहने
और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों की बर्खास्तगी की चर्चा के कारण मूल्यों में गिरावट और
वृद्धि की अवधारणा लगभग बराबर रही।
…...बंबई शेयर बाजार का सूचकांक अभी 2500 अंकों से नीचे बना हुआ जबकि वह कल के 2477.19 के
मुकाबले आज 2473.56 अंक रहा।..............
विशिष्ट शेयरों में बांबे डाइंग में 50 रुपए की चमक आई और यह 5950 रुपए हो गया जब कि एसीसी और
नोसिल 25 रुपए चढ़कर क्रमश 2300 रुपये और 1375 रुपए पर बंद हुए। टाटा टी और हिंद अल्यू में
क्रमश 365 और 660 रुपये पर क्रमश 35 तथा 35 रुपए निकल गए।
तेलिया राजाओं की लिवाली
यह ठेठ हिंदी के ठाठ की रिपोर्टिंग है।
अंगरेजी में किसी उद्योग के बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति को अनौपचारिक बातचीत में उस उद्योग का किंग
घोषित किया जाता है, जैसे टेक्सटाइल किंग, लिक्वर किंग, टेलीकाम टाइकून। हिंदी में बंबई और रा
जकोट के महत्वपूर्ण तेल कारोबारियों को तेलिया राजाओं के नाम से संबोधित किया जाता रहा है।
रिपोर्टिंग में बाकायदा इसे लिखा जाता रहा-
राष्ट्रीय सहारा 25 दिसम्बर, 1994, पेज नंबर आठ
दो कालम की खबर
लिवाली बढ़ने से मिल डिलीवरी खाद्य तेलों के भावों में वृद्धि हुई
नयी दिल्ली, 24 दिसम्बर (एन.एन.एस.) बम्बई, राजकोट आदि में तेलिया राजाओं की लिवाली बढ़ने
था पड़ोसी राज्यों से भी मजबूती के समाचार आने से मिल डिलीवरी खाद्य तेलों में 10-30 रुपये प्रति
क्विंटल की वृद्धि हुई। अलवर का सारथी वनस्पति तथा तेल सरसों रिफाइंड 3-5 रुपये बढ़कर क्रमश
602 रुपये व 550 रुपये टीन हो गया। सारथी गुजरात पहुंच 630 रुपये के भाव दो ट्रक बिका थआ।
चीनी में कारोबार कमजोर रहा। मूंग, मोठ तथा चने राजस्थानी में 30-85 रुपये का उछाला आया।
अनाज तथा दालें
दाल मिल वालों तथा पेशेवर सटोरियों की दिल्ली व दिसावरी में एकतरफा लिवाली चलने से दालों की
सप्लाई लाइन टूट गयी। केन्द्रीय खाद्य तथा सिविल सप्लाई मंत्रालय मंत्री विहीन होने से सटोरि
यों का विचार है कि वह मनमानी लिवाली कर सकते हैं। परिणामस्वरुप बढिया मूंग 1425 रुपये पर
85 रुपये तथा इसकी दाल 50-100 रुपये का उछाला खा गयी।
गुड़ व चीनी
मिल डिलीवरी चीनी में कई मिल वालों ने भाव नहीं निकाले, दूसरी और स्थानीय तथा दिसावरी लि
वाली भी कुछ कमजोर पड़ने लगी। मिल डिलीवरी मवाना 1147 रुपये पर तीन रुपये नीची सुनी गयी,
जबकि एस ग्रेड मिल डिलीवरी खिताबी 1095 रुपये मजबूत बतायी। विदेशी चीनी में बिकवाली नहीं
थी।
सोने की पकड़ और भाव
अवैध रुप से लाये जाने वाले सोने की पकड़ को सोने के बाजार में एक महत्वपूर्ण तत्व के तौर पर चिह्नि
त किया जाता रहा।न
राष्ट्रीय सहारा 25 दिसंबर, 1994, पेज नंबर आठ
सिंगल कालम शीर्षक
नयी दिल्ली-24 दिसंबर(एनएनएस)
शुरु में भारी गिरावट के बाद सुधऱने पर भी चांदी पूर्वस्तर से कुछ नीचे रही। कल लगभग 12 हजार कि
लो विदेशी चांदी की जोरदार आवक से चांदी 999 टंच शुरु में 6300 रुपये से गिरकर 6225 रुपये पर आ
गयी थी, लेकिन बाद में आगरा, मथुरा, राजस्थान आदि से मांग आ जाने से हाजिर भाव 6290 रुपये
दोपहर के समय हो गये। पूर्व स्तर से यह केवल दस रुपये नीचे थे।
......यद्यपि विदेशों में सोना आधा डालर घटकर 481.50 डालर के आसपास आ गया, लेकिन दो करोड़
का माल पकड़े जाने से सोना 10 रुपये बढ़ गया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की भूमिका ......
नब्बे के दशक में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भूमिका लगातार मजबूत होती
देखी। सत्तर और अस्सी के दशक की शेयर बाजार रिपोर्टिंग में घरेलू संस्थानों जैसे यूटीआई, एलआईसी
की भूमिका को शेयर बाजार की रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण तौर पर चिह्नित किया जाता है। जैसे
यूटीआई अगर बाजार में शेयरों की बिक्री शुरु कर देता था तो बाजार में गिरावट आ जाती थी। या
यूटीआई और एलआईसी अगर बाजार से खरीदना शुरु कर देते थे, तो बाजार के भाव चढ़ जाते थे।
पर नब्बे के दशक में विदेशी वित्तीय संस्थानों का असर भारतीय शेयर बाजार और उसकी रिपोर्टिंग पर
साफ दिखायी देने लगा।
राष्ट्रीय सहारा 26 दिसंबर, 1994 पेज नंबर आठ पांच कालम
शीर्षक-वर्ष के अंतिम कारोबारी सप्ताह में नरमी का रुख रहा
नयी दिल्ली -25 दिसम्बर (वार्ता) देश के प्रमुख शेयर बाजारों में वर्ष 1994 का अंतिम कारोबारी
सप्ताह नरमी की धारणा लिये बीत गया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की निष्क्रियता तथा देशी वित्त संस्थानों की सीमित लिवाली से बाजार
को आंशिक समर्थन ही मिल पाया। विशिष्ट वर्ग के शेयरों में कारोबार कमजोर रहा, जबकि छोटे नि
वेशकों के समर्थन में नकद वर्ग में कारोबार ठीक-ठाक रहा।
केंद्र में गुरुवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे से जहां एक और सरकार की धूमिल होती छवि में
निखार आने की धारणा बनी थी, परंतु सप्ताहांत में शनिवार को वरिष्ठ नेता और मानव संसाधन
विकास मंत्रि के इस्तीफे से केंद्र सरकार पर अस्थिरता के बादल छाने लगे। बहरहाल, शनिवार को शेयर
बाजार बंद रहता है और यही नहीं, देश के तमाम शेयर बाजारों में अगले सप्ताह शीतकालीन अवकाश
रहेगा। अब दो जनवरी, 95 को ही शेयर बाजार खुलेंगे.......।
दिल्ली शेयर बाजार के लगातार दूसरे वर्ष अध्यक्ष बने अशोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि श्री अर्जुन
सिंह के इस्तीफे के पश्चात सत्ताधारी दल में क्या कुछ घटता है, उस पर शेयर बाजार की चाल निर्भर
करेगी। ....श्री अग्रवाल ने कहा कि फरवरी में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर
बहुत कुछ निर्भर है। शेयर बाजार के लिए ये चुनाव महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कंपनियों के उत्साहवर्धक
वित्तीय परिणाम आने और आर्थिक गतिविधियां सकारात्मक दिशा में बढ़ने से शेयर बाजार टूटने की
संभावना धूमिल लगती है। .............
विदेशी संस्थागत निवेशकों का रोल
दैनिक जागरण 27 दिसंबर, 1997 पेज नंबर दस,
तीन कालम का शीर्षक
सेंसेक्स 26 अंक चढ़ा
मुंबई, 26 दिसंबर (वार्ता) मुंबई शेयर बाजार में आज चालू सेटलमेंट के अंतिम दिन संस्थानों की लिवाली
से शेयरों में सुधार का रुख रहा। मुंबई संवेदी सूचकांक 25.69 अंक की बढ़त लेकर 3633.38 अंक हो
गया.। इससे पिछले दिन 24 दिसंबर को यह 3607.69 अंक पर बद हुआ था। कारोबार के दौरान आज
यह 3620.92 अंक पर खुलने के बाद 3651.42 अंक तक ऊपर गया। समाप्ति पर 3633.92 अंक पर बंद
हुआ। .....बाजार सूत्रों के अनुसार विदेशी और घरेलू संस्थानों ने आज टाटा टी, हीरो होंडा और हिं
द लीवर जैसे चुनिंदा शेयरों में सामान्य खरीदारी की। मुंबई शेयर बाजार संचालक मंडल ने अपने अब तक
के इतिहास में पहली बार इस वर्ष क्रिसमस के मौके पर पड़ने वाली करीब एक सप्ताह की छुट्टियों
को कम करके बाजार को खुला रखा है। ..........
(अब शेयरों को नाम इंगलिश में देने में हर्ज नहीं था। बल्कि शेयरों के नाम दैनिक जागरण में इंगलिश में
ही दिये जा रहे थे)
वही तेजी, वही ढीलापन
शेयर बाजार में विदेशी संस्थानों की भूमिका भले ही नयी हो गयी हो, पर बाजार रिपोर्टिंग में तेजी
और ढीलापन वही का वही था।
दैनिक जागरण 25 दिसंबर, 1997 पेज नंबर दस
दो कालम –
गेहूं में भारी तेजी, गुड़ ढीला पडा
दिल्ली 24 दिसंबर (एन.एन.एस.) चौतरफा मांग से गेहूं उसके उत्पादों में भारी तेजी तथा चने, उड़द
व मूंग में 25-50 रुपये की नरमी दिखाई दी। राजधानी बेसन की बोरी 30 रुपये बढ़कर 1850 रुपये
हो गई। गुड़ में 75-125 निकल गए। चीनी में कारोबार कमजोर था। तेल गोला परिवार तथा तेल
सरसों 5-25 रुपए टीन बढ़ गए। नीम तथा चावल के तेलों में 25-50 रुपये की नरमी थी। किराना में
लाल मिर्च, धनिया तथा मेथी 100-400 रुपये और बढ़ गई। जीरा टूटने लगा। मेवों में आबजोश नरम
था।
. ....... दूसरी और, मौसम कुछ साफ होने से मंडियों में आवकें बढ़ने की खबर से राजस्थानी चने, रा
जमां चित्रा, उड़द तथा अरहर के भाव 25-50 रुपए टूट गए। दिसावरों से भी ढीले समाचार
थे। ...............
इस दौर की बाजार रिपोर्टिंग कुछ नये और पुराने तत्वों को साथ रखकर चलती हुई दिखायी दी।
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