[दीवान]नौवीं पोस्ट-मुख्य बिंदु , निष्कर्ष , सुझाव - एक

Ravikant ravikant at sarai.net
Thu Nov 29 22:08:49 IST 2007


नौवीं पोस्ट-मुख्य बिंदु, निष्कर्ष, सुझाव 
1-1947 के आसपास 
रोटी, कपड़ा और मकान से मौजूदा रोटी, कपड़ा और मोबाइल तक 
बंबई की पुरानी फिल्मों को देखें, तो उद्योगपति आम तौर पर कपड़ा उद्योगपति हुआ करता था। 
ज्यादा पुरानी नहीं, बोले तो, 1983 में आयी बी. आर. चोपड़ा की फिल्म मजदूर में उद्योगपति
 टैक्सटाइल की फैक्ट्री के मालिक थे। हीरो राज बब्बर टेक्सटाइल इंजीनियर थे। साहब, 
जलवा था टेक्सटाइल  का। रोटी, कपड़ा और मकान मिल जाये, बहुत था। इससे ज्यादा सपने क्या थे। 
रोटी, कपड़ा और मकान जहां केंद्र में हों, वहां टेक्सटाइल कंपनियों का जलवा तो स्वाभाविक होगा 
ही। बम्बई शेयर बाजार की कवरेज में टेक्सटाइल शेयरों के भाव अलग से, अलग श्रेणी में दिये जाते थे। 
शेयर बाजार पर एक रिपोर्ट यह देखिये-
हिंदुस्तान 23 अगस्त, 1947, आखिरी पेज, छठा पेज
आखिरी कालम , सातवां 
व्यापार समाचार
बम्बई शेयर बाजार
बम्बई, 22 अगस्त। बम्बई शेयर बाजार के भाव आज इस प्रकार रहे-
सिक्योरिटीज- ...
टेक्सटाइल
अहमदाबाद एडवांस-465)
बाम्बे डाइंग-  1055)
सेंट्रल इंडिया-306)
कोलावा लैण्ड-240)
सेंचूरी मिल्स -980)
गोकाक-317)
इंडिया ब्लिचिंग-158)
कोहीनूर- 578)
फोनिक्स-1,210)
स्वदेशी-596)
शोलापुर-6125)
विष्णु-615)-रिपोर्ट खत्म 

जरा सीन खींचिये आंखों के सामने, कट टू 1947, आफ कोर्स ब्लैक एंड व्हाईट में ही सही, 
बम्बई शेयर बाजार में सौदे हो रहे हैं। टेक्सटाइल कंपनियों के बास लोग सिगार मुंह से लगाये, सिर 
ऊपर की उठाये, मानो यूं कह रहे हों कि शेयर बाजार ही हम चलाते हैं। सो बाजार की रिपोर्टिंग 
में  टेक्सटाइल कंपनियों के भावों को जोरदार भाव देना पड़ेगा-जोरदार भाव- बाम्बे डाइंग 1055 
रुपये, 22 अगस्त 1947 के भाव। 
ऊपर लिखी टैक्स्टाइल कंपनियों में अधिकांश मुहावरे की भाषा में बोलें, तो काल के गाल में समा गयी 
हैं। अर्थव्यवस्था रोटी, कपड़ा और मकान से उठकर रोटी, मोबाइल और मकान पर आ गयी। और सिर्फ 
रिकार्ड के लिए नोट करते चलें कि बांबे डाइंग जो उस दौर में दिलीप कुमार जैसी स्टार होती थी, 
अब 2007 में एक्स्ट्रा की हैसियत में मुश्किल से मानी जाती है। 

1947 के आसपास उद्योगों से लेकर शेयर बाजार तक टेक्सटाइल कंपनियों का दबदबा था,
 वही शेयर बाजार की रिपोर्टिंग में भी दिखायी देता था। 

2-सिलसिला 1947 से 1957 तक का 
चीनी कम यानी चोरी का खुला बाजार
बुजुर्ग बताते हैं और कुछ इस अंदाज में बताते हैं कि पुराने टाइम में सब कुछ एकदम ठीक-ठाक था। 
ईमानदारी ही ईमानदारी सब तरफ बरसती थी। आदर्शों की चौतरफा बरसात होती थी। पर बाजारों 
की रिपोर्टिंग बताती है कि मामला एकदम पाजिटिव नहीं था। चोर भी थे, उनका बाजार भी था। 
और न सिर्फ था, बल्कि उसकी बाकायदा रिपोर्टिंग होती थी, देखें-
हिंदुस्तान मंगलवार 6 दिसम्बर, 1949, पेज नंबर छह

चीनी की साप्ताहिक रिपोर्ट-
बाजार की स्थिति में सुधार नहीं-तटकर बोर्ड की जांच-खंडसारी के भाव तेज-तीन कालम की रिपोर्ट
(निज संवादाता द्वारा)
हापुड़, 5 दिसम्बर। चीनी के बाजार की स्थिति में अभी कोई सुधार नहीं हुआ है। जानकार लोगों का 
कहना है कि अधिकारी कुछ भी कहें अभी जल्दी कोई सुधार नहीं होना भी नहीं है। बहुत कम चीनी 
कहीं-कहीं पर सरकारी भावों पर राशन कार्डों में बिक रही है लेकिन उतनी कम मात्रा में किस का 
काम चलता है और लोगों को चोर बाजार वालों का मुंह देखना पड़ता है।.....लेकिन चोर बाजार से 
कानपुर में 120) , हापुड़ में 80) और मुजफ्फरनगर में 75) प्रति मन के भाव में बहुत थोड़ी चीनी मिल 
पाती है। बंबई में चोर बाजार का भाव 62) , प्रति 14 सेर के मन के हैं। विवाह शादियों का 
आजकल शाहलग होने के कारण मांग बहुत है और लोग बहुत परेशान हैं। ...... रिपोर्ट खत्म

रिपोर्ट की भाषा बोलचाल की भाषा है-जैसे –उतनी काम मात्रा में किस का काम चलता है और लोगों 
को चोरबाजार वालों का मुंह देखना पड़ता है। शाहलग ठेठ हिंदी का शब्द का है, जिसका आशय है –
विवाह-शादियों के मुहूर्तों का समय। 
चोरी का खुला बाजार रिपोर्टिंग में देखने में आता था। गौरतलब है कि यह दौर कंट्रोल का दौर था। 
चोर बाजार की रिपोर्टिंग को सामान्य रिपोर्ट में ही दिया जाता था। ताकि चोर बाजार से ला
भान्वित होने की इच्छा रखने वालों के लिए सनद रहे, और वक्त-जरुरत काम आये। 

समाजवाद से घबराहट
 उस दौर में शेयर बाजार समाजवाद से डरता था। समाजवाद से डरकर बाजार के  भाव के गिर जाया 
करते थे। बाजार रिपोर्टिंग में इस डर को साफ देखा जा सकता है-
 हिन्दुस्तान गुरुवार 23 दिसम्बर 1954,पेज नौ
बम्बई शेयर बाजार
प्रधानमंत्री के भाषण के फलस्वरुप शेयरों में गिरावट 
देश के लिए समाजवादी अर्थ-व्यवस्था की वकालत बाजार के लिए परेशानी
(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)
बम्बई, 22 दिसम्बर, । प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरु द्वारा देश के लिए समाजवादी अर्थ
 व्यवस्था की वकालत करने के कारण शेयर बाजार में आज परेशानी की भावना पाई जाती थी। तेजड़िए 
अपने शेयर बेचने को उत्सुक थे। बम्बई डाइंग में जो कि हाल ही में बाजार में उल्लेखनीय बना हुआ था, 
20) की गिरावट आई। टाटा आर्डीनरी और इंडियन आयरन दोनों ही दबे हुए रहे। कल के भावों की 
तुलना में सभी शेयर गिर कर बन्द हुए। .........रिपोर्ट खत्म

गौरतलब है कि यह वह दौर था, जब जीवन बीमा निगम शेयर बाजार में महत्वपूर्ण खिलाड़ी हुआ करता 
था। जीवन बीमा निगम अगर शेयर बाजार से शेयर खरीदा करता था, तो बाजार ऊपर उठ  जाया 
करता था  और अगर निगम खरीदारी नहीं करता था, तो बाजार में मंदी की भावना आ जाया करती 
थी। दरम्याने शब्द का प्रयोग बहुतायत में होता था। दरम्याने से मतलब मीडियम स्तर, मध्यम स्तर 
से है। कुल मिलाकर 1947 से 1957 की बाजार रिपोर्टिंग समाजवाद के डर को बयान करती है। समा
जवाद से बाजार खामोश, अस्थिर , सहमा हुआ हो जाता था। 
समाजवाद आता था, या नहीं आता था, यह सवाल तो अलग है, पर शेयर बाजार उसके आने की बात भर 
से डर जाया करता था। 

2- 1958-1967 की अवधि उर्फ युद्धों के मारे बाजार
1958-1967 की अवधि में भारत ने दो युद्धों  का सामना किया, 1962 में चीन के साथ और 1965 में 
पाकिस्तान के साथ। इस अवधि की बाजार रिपोर्टिंग में इन युद्धों की छाप साफ दिखायी देती है। 
सामान्य बाजार रिपोर्टिंग के साथ-साथ युद्ध के असर को भी बाजार रिपोर्टिंग ने इंगित किया। 

रौनक को कांग्रेसी धक्का
शेयर बाजार तब परेशान हो जाता था, जब निजी क्षेत्र के मुनाफे पर किसी तरह की सीमा लगाने की 
बात कही जाती थी। ये वह दौर था, जब सार्वजनिक क्षेत्र, समाजवाद के मसले कांग्रेस में जबरदस्त 
चर्चा के विषय थे। इस चर्चा का असर शेयर बाजार पर खासा पड़ता था। देखें-

हिन्दुस्तान, शुक्रवार 2 जनवरी, 1959
पेज नंबर सात, दो कालम
बम्बई शेयर (वार्षिक समीक्षा)
प्रारम्भिक रौनक के बाद 1958 के अंत में निराशा
बम्बई, 1 जनवरी। 1957 की तुलना में 1958 का वर्ष शेयर बाजार के लिए काफी उत्साह का 
वर्ष रहा और लगभग सभी शेयरों में चहुंमुखी सुधार हुआ। बाजार में पुन विश्वास की भावना आ जाने 
से कारोबार में भी वृद्धि हुई और वर्ष के अधिक हिस्से में भावों में ऊंचे की भावना रही, किन्तु वर्ष के 
अन्त में शेयर बाजार की भावना को गहरा धक्का लगा और भाव गिर गए। इसका मुख्य कारण कांग्रेस 
कार्य समिति का वह प्रस्ताव था जिसमें निजी क्षेत्र लाभ पर सीमा लगाने की बात कही थी। इस 
प्रस्ताव का असर यह हुआ कि शेयरों का काफी लाभ खत्म हो गया और वे वर्ष के उच्चतम भावों से का
फी नीचे बन्द हुए। रिपोर्ट खत्म।
	
अनियमितता का मतलब वह नहीं......
	बाजार रिपोर्टिंग में जब अनियमितता –शब्द का प्रयोग किया जाता था, तो अनियमितता का आशय 
यह नहीं होता था कि बाजार में घपले चल रहे हैं। बल्कि अनियमितता का आशय यह होता था कि बा
जार एक नियमित प्रवृत्ति –ऊपर जाने की या, नीचे जाने की नहीं दिखा रहा है , बल्कि कभी ऊपर 
कभी नीचे जा रहा है। देखें-
हिन्दुस्तान शनिवार, 24 जनवरी, 1959
पेज नंबर सात दो कालम
सूंठ में तेजी-चने के भाव और बढ़े –वायदे नरम
(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)
दिल्ली 23 जनवरी। आज स्थानीय वायदा बाजारों में अन्त में नरमी आई। तैयार मंडियों में गिनी-चुनी 
जिन्सों के भावों में बढ़ोत्तरी हुई। किराने में सूंठ के भावों में लगभग रु. 10 प्रति मन की तेजी आई। 
चने के भाव कुछ ऊंचे हुए। 
............जिन्स वायदों में अनियमितता रही। गुड़ वायदे मामूली नरम खुलकर सुधरे, मगर केन्द्रीय 
खाद्य मंत्री श्री अजीत प्रसाद जैन के अवकाश ग्रहण करने की खबर से भाव कमजोर हो गये। बाद में 
सरसों वायदे की सहानुभूति में भावों में सुधार हुआ था, वह भी बाद में  बिक्री के दबाव में टिक न 
सका और भाव फिर कमजोर हो गए। ..........रिपोर्ट खत्म 

उस कनेक्शन का डर
यूनियनों का डर खासा होता था। खास तौर पर भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस से जुड़े यूनि
यन नेताओं की बातों का शेयर बाजार के भावों पर फर्क पड़ता था। आज यह बात खासी अजीब सी लग 
सकती है। आज बड़ी कंपनियों के ट्रेड यूनियन नेताओं के नाम-बयान भले ही अखबारों के लिए कोई अहमि
यत न रखें, पर एक दौर में अख़बार से लेकर शेयर बाजार तक इनका नोटिस लेते थे। देखें- 
हिन्दुस्तान, सोमवार 26 जनवरी, सन् 1956 पेज नंबर सात
दो कालम की खबर 
बम्बई शेयर 
विक्रेता बाजार पर छा गए-कपड़े के उत्पादन में कमी
(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)
बम्बई 25 जनवरी। केंद्रीय सरकार का बजट प्रस्तुत किए जाने में अभी पांच सप्ताह शेष हैं और शेयर बा
जार में ताजी गिरावट आ गई है। बाजार का रुख पूर्णत सतर्कता पूर्ण  था। 
नया हिसाब सतर्क रुख से साथ शुरु हुआ और बाजार पर विक्रेता छाए हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड 
यूनियन कांग्रेस द्वारा सम्बन्धित टाटा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री माइकेल जोन ने जमशेदपुर में एक 
सभा में कहा कि टाटा स्टील के प्रबन्धकों ने वेतन के ढांचे में संशोधन करने के सिलसिले में रु. 
1,02,00000 अधिक खर्च करना स्वीकर कर लिया है, जबकि यूनियन ने इस कार्य के लिए रु. 3 करो
ड़ की मांग की थी और कम्पनी के वित्तीय वर्ष के अंदर इस की घोषणा कर दी जाएगी।  इस भाषण 
का बाजार की भावना पर प्रतिकूल असर पड़ा। ....रिपोर्ट खत्म। 

चीन के हमले की तेजी सराफे में 
 बाजार निर्मम होता है। 
सराफा बाजार अपवाद नहीं है। चीन के हमले की शुरुआत का दौर था वह। बाजार में कारोबारी इस
 स्थिति का नफा-नुकसान देखकर सौदे कर रहे थे। बाजार में तेजी थी, चीनी के हमले की, देखें-

हिंदुस्तान  22 अक्तूबर 1962, पेज नंबर सात, दो कालम की खबर
बम्बई सराफा
भारतीय चौकियों पर चीनी हमले से सराफे में तेजी
(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)
बम्बई, 21 अक्तूबर। गत सप्ताह सराफा वादा तेज रहा। शुरु के कारोबार में कुछ मुलायम रहने के बाद 
नेफा और लद्दाख के क्षेत्रों में भारतीय चौकियों पर चीनियों के हमले, दीवाली के कारण तैयार बाजा
र में खरीदारी बढ़ने और फलस्वरुप स्टाक कम होने के कारण दोनों धातुएं कारोबारियों को आकर्षित 
करती रहीं। ..रिपोर्ट खत्म। 

चीन से लड़ाई में शेयर बाजार को घाटा 
खासा दिलचस्प है यह देखना कि जब सरकार चीन से लड़ने के लिए कृतसंकल्प हो रही थी, तब 
शेयर बाजार इस पर चिंतित था और हिचकिचा रहा था यानी इस वजह से मजबूती का रुख नहीं दिखा 
रहा था। देखें-

हिंदुस्तान  22 अक्तूबर 1962, पेज नंबर सात, दो कालम की खबर
बम्बई शेयर
नेफा सीमा पर संघर्ष की खबरों का बाजार पर प्रभाव
मुहुर्त कारोबार की धूमिल सम्भावनाएं 
(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)
बम्बई, 21 अक्तूबर। ताजे प्रोत्साहन के अभाव में गत सप्ताह दलाल स्ट्रीट में गतिरोध की स्थिति
 रही। बाजार की भावना नेफा सीमा पर चीनी सीमा की कार्यवाही से प्रभावित होती रही। 
कारोबार मामूली था और रुख उत्साहजनक नहीं था। 
मुहुर्त कारोबार की सम्भावनाएं धूमिल प्रतीत होती हैं। देश में यातायात हड़ताल के कारण शहर के बा
जारों की सक्रियता में बाधा पहुंची है। मजदूरों और कारीगरों के हड़ताल के कारण बम्बई कपड़ा बाजा
र में हड़ताल की स्थिति गम्भीर है। फलस्वरुप कपड़े की डिलीवरी सभी स्तर पर रुकी हुई है। इसका 
रेशम और रेशमी सामान के बाजार पर प्रभाव पडा है, जहां कि उत्तर भारत के खरीदार और आढ़तिए 
खरीदारी करना नहीं चाहते। इस स्थिति में खुदरा दुकानदारों का लाभ हुआ है, और अच्छा कारोबार 
कर रहे बताए जाते हैं। भावों में आम वृद्धि के कारण यहां भी गिरावट आई है। 
नेफा सीमा की गम्भीर स्थिति के कारण दलाल स्ट्रीट में नया हिसाब हिचकिचाहट के साथ खुला।
 सप्ताह भर इसी बात का बाजार की भावना पर प्रभाव पड़ता रहा क्योंकि सरकार चीनियों को पी
छे धकेलने के लिए कृतसंकल्प है। इसका मतलब सुरक्षा खर्च में वृद्धि और आगामी अर्ध वर्ष की अवधि के 
लिए आयात कार्यक्रम में गम्भीर कटौती हो सकता है। सीमा पर सैनिक संघर्ष की पृष्ठभूमि में उद्योग 
के लाभ के सम्बन्ध में कारोबारियों में चिन्ता पैदा हो गई है। यदि बाजार का समर्थन किया गया है 
निश्चित रुप से मन्दड़ियों की पटान के रुप में था। 
............फिर भी बाजार ने शुक्र और शनि को ऊपर उठने का प्रयत्न किया लेकिन ढोला चौकी 
क्षेत्र लद्दाख में चीनियों के नए हमले की खबर से प्रगति रुक गई।  रिपोर्ट खत्म। 
चीन से लड़ने की कृत-संकल्पता का आशय था-सुरक्षा व्यय में और बढ़ोत्तरी। इसका आशय था और कर, 
इसका आशय था कंपनियों के लाभ में कमी। इसका आशय था शेयर बाजार की निराशा और इसका नतीजा 
शेयर बाजार की हिचकिचाहट के रुप में निकला। जैसा कि ऊपर की रिपोर्ट इंगित करती है-सीमा पर 
सैनिक संघर्ष की पृष्ठभूमि में उद्योग के लाभ के सम्बन्ध में कारोबारियों में चिन्ता पैदा हो गई 
है। ....

तस्करी के उछाल
तस्करी का आशय़ सिर्फ यह नहीं है कि माल एक देश से दूसरे देश को पार होता है, बल्कि एक राज्य से 
दूसरे राज्य को अनधिकृत तौर पर पार होने वाला माल भी तस्करी के दायरे में आता है। और 
इसका बाजार की प्रवृत्तियों पर बाकायदा असर पड़ता रहा है। देखें-
हिन्दुस्तान 12 जून, 1965, पेज नंबर सात तीन कालम का शीर्षक, दो कालम का इंट्रो व एक कालम 
की खबर-
दिल्ली की मंण्डियां
बढ़िया ज्वार दृढ़: लोबिया ऊंचा : सरसों तथा उसके तेल में तेजी
	(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)
	दिल्ली 11 जून। बिजाई1 के लिए पंजाब की मंडियों के तस्करी निर्यात होने की चर्चा 
से बढ़िया ज्वार दो रुपए बढ़ाकर बोली गई। इसीलिए एक सप्ताह में लोबिया 5 से 15 रुपए प्रति
 क्विन्टल उछल गया। मंदी की आशा से गेहूं के खरीदार पीछे हट गए। चना व छिलका चना में मजबूती 
रही। सररों लाहा  कच्ची घानी में 2 से 6 रु. की और तेजी आई। गोला दो रु. बढ़ गया। चीनी में 
35 रु. प्रति बोरी की प्रीमियम सुनी गई।...............रिपोर्ट खत्म। 


3-1968-1977 की अवधि

कमोबेश वैसे ही भाव 
1947 से 1968 करीब इक्कीस साल बाद का बाजार रिपोर्टिंग का सीन देखें, तो साफ होता है। 
बाजार रिपोर्टिंग के हाव-भाव बदले नहीं थे। देखिये-

हिन्दुस्तान 25 जून, 1968, पेज नौ, दो कालम 
बम्बई शेयर
कटान और समर्थन के अभाव में प्रमुख शेयर नीचे
(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)
बम्बई 24  जून। शेयर आज खामोश खुले और तेजड़ियों की कटान तथा नए समर्थन के अभाव में गिकर
स्टील शेयर खामोश बंद हुए। नई खरीदारी का अभाव था।......
नकद समूह स्थिर था। चुने हुये शेयरों में खरीदारी हुई। विविध समूह में ग्वा. रेयन, ने. रेयन, वोल्टा
स, सिंधिया और अन्य शेयरों में कटान हुई। ....रिपोर्ट खत्म। 

कटान, खामोशी............वही सब था। 
बल्कि इसके बाद भी यही सब था। साल गये। दशक गये, पर यह कटान नहीं गयी। यह खामोशी नहीं 
गयी। 

तस्करी की खुली रिपोर्ट
उस दौर में तस्करी की खुली रिपोर्ट सामान्य थी। मतलब तस्करी का क्या असर भावों पर है, इस बा
त को बताया जाता था। देखें-
हिन्दुस्तान 25 जून, 1968, पेज नौ, दो कालम
दिल्ली सराफा
आवक बढ़ने से सोने और चांदी दोनों के भाव गिरे
(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)
दिल्ली 24 जून। प्रारम्भिक तेजी के पश्चात् सोने व चांदी के भाव आवक बढ़ने से टूट गए। 
बम्बई के सुधऱते समाचारों से चांदी तेजाबी प्रारंभ में रु. 3.25 बढ़कर  खुली थी लेकिन बाद में बिहा
र, उत्तर प्रदेश व पंजाब में आवक बढ़ने के कारण इसके भाव पूर्व स्तर से भी नीचे आ गए। चाँदी का
 सिक्का भी इसकी सहानुभूति में लुढ़क गया। आज लगभग 30 सिल्ली चांदी का माल आया जबकि उठाव 
15 सिल्ली के आसपास था। 
	बम्बई में कस्टम अधिकारियों की सख्ती से माल कम बनने के कारण नकली गिन्नी एक 
रुपया सुधरती सुनी गई। शुद्ध सोना निजी कारोबार में पहले तो रु. 163 के बजाए रु. 164 हो गया 
लेकिन बाद में बम्बई से 2000 तोले सोने की तस्करी आवक  होने से इसके भाव गिरते सुने गए। 
...............रिपोर्ट खत्म। 

युद्ध का असर तस्करी पर, तस्करी का असर सोने के भावों पर 
बाजार रिपोर्टिंग बताती है कि युद्ध का असर कितना बहुआयामी था। एक नमूना देखें-
हिन्दुस्तान 5 दिसम्बर, 1971 पेज नंबर सात दो कालम
दिल्ली सराफा 
तस्करी आवक घटने से सोना तेज : चांदी में नरमी
(हमारे संवाददाता द्वारा)
दिल्ली , 4 दिसम्बर। तस्करी आवक घटने के कारण शुद्ध सोना एकदम 4 रुपए बढ़ता सुना गया। 
इसके विपरीत चांदी 2.50 रुपये टूट गई। कारोबार संतोषजनक रहा। 
	भारत के कई हवाई अड्डों पर पाकिस्तानी हमला होने की खबर से सोने की तस्करी आवक 
एकदम बंद हो जाने की आशंका थी, जिससे निजी कारोबार में शुद्ध सोना 4 रुपए बढ़कर 198 रुपए हो 
गया। जेवर और स्टैंडर्ड सोने में भी दो-दो रुपए की तेजी आई। 
	यद्यपि आज कच्ची चाँदी की आवक 20 सिल्ली तथा मांग 15 सिल्ली की थी लेकिन आरम्भ में चाँदी के 
भाव पाकिस्तानी हमला होने की खबर से 509.50 से घटकर 506 रह गए थे।  बाद में  भारतीय
 प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा पाकिस्तानी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की घोषणा से
 चांदी साप्ताहिक डिलीवरी के भाव सुधरकर 507 रुपए हो गए लेकिन पूर्वस्तर से फिर भी 2.50 रुपए 
नीचे थे। सिक्का भी चांदी के समर्थन में 4 रुपए प्रति सैंकड़ा टूट गया। ..........रिपोर्ट खत्म। 
	युद्ध का मतलब था तस्करी को सोने की आवक रुकना और तस्करी के सोने की आवक
 रुकने का मतलब था, कुल सप्लाई में कमी। इसलिए बाजार के भाव बढ़ गये। सोने के बाजार के लिए
 युद्ध सिर्फ युद्ध नहीं था, सोने की सप्लाई रुकने का कारक था, बाजार रिपोर्टिंग इस बात को 
रेखांकित करती है। 

उम्मीद नाउम्मीदी पाकिस्तान के तस्करों से भी 
	सिर्फ आधिकारिक कारोबार से ही बाजार उम्मीद नहीं लगाता था।
	पाकिस्तान से होने वाली तस्करी से भी बाजार उम्मीद बांधता था या नाउम्मीद होता था। 
	एक खबर देखिये-


	हिन्दुस्तान 2 दिसम्बर 1974, पेज 5, एक कालम की खबर
	दिल्ली सराफा (सा.समीक्षा)
	सोने व जेवर में हानि 
	दिल्ली, 30 नवंबर, (ह.स.)। पूर्वी भारत से तस्करी आवक होने तथा व्यापार संबंध होने के बाद पा
किस्तान से तस्करी आवक बढ़ने की उम्मीद से सोना व जेवरों में 10 से 14 रु. का मंदा आया। 
चांदी भी सीमित कारोबार में टूट गई। 
	लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, कलकत्ता आदि पूर्वी भारत की मंडियों में तस्करी आवक बढ़ने तथा बाद में 
बंबई में स्टैंडर्ड सोने का भाव टूट जाने से गत सप्ताह सराफा बाजार में सोना विटूर व बिस्कुट के भा
व 530  और 540 से घटकर 516 और 530 रु. होते सुना गया। जेवर और स्टैंडर्ड सोने में 512 व 521 
रु. पर 13 से 14 रु. का मंदा आया। मंदे की तह में यह कारण भी विद्यमान था कि पाकिस्तान से
 व्यापार संबंध होने के बाद जब वहां से माल आने लगेगा तब उसकी आड़ में चोरी-छिपे सोना भी आ जा
एगा। असली  गिन्नी का भाव 400 रु. सुना गया। ..रिपोर्ट खत्म। 

अनिश्चितता के तनाव
	पर जनता पार्टी की जीत भर से अनिश्चितता की स्थिति खत्म नहीं हुई। तमाम तरह की 
अनिश्चितताएं बनी हुई थीं। बाजार इन अनिश्चितताओं के असर में झूल रहा था, बाजार रिपोर्टिंग ने 
इसे दर्ज किया है-
हिन्दुस्तान 28 मार्च, 1977 पेज सात तीन कालम की खबर
दिल्ली मंडी की साप्ताहिक समीक्षा
राजनीतिक घटनाचक्र का कारोबार की धारणा पर प्रभाव
दिल्ली 27 मार्च (ह.स.) उत्पादन मंडियों में सप्लाई स्थिति सुगम होने तथा मांग के अभाव में गत
 सप्ताह मूंगफली और बिनौला के तेलों में 40 रु. प्रति क्विंटल तक मंदा आया। तेल सरसों पक्की घानी 
व तेल गोले के भाव 12 से 13 रुपये प्रति टीन लुढ़क गए। तेल अलसी 60 रुपए और बढ़ाकर बोला गया। 
नीरस कारोबार में चीनी के भाव 14 रुपए तक लुढ़क गए। दालों में मिला-जुला रुख रहा जबकि गेहूं में 
मजबूती तथा चावल और चने में नरमी दिखाई दी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार कांग्रेस को 
लोकसभा के चुनाव में अभूतपूर्व हार का सामना करना पड़ा और केन्द्र में श्री मोरारजी देसाई के 
नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बन गई। 
......
तेल तिलहन
यद्यपि श्री जगजीवनराम व उनके साथियों द्वारा नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री श्री देसाई के मंत्रिमंडल 
में गतिरोध और अनिश्चितता का वातावरण पैदा उत्पन्न कर दिए जाने की खबर थी लेकि
न ............कुछ व्यापारियों का विचार है था कि श्री देसाई अपने अनुभव और सूझबूझ के बल पर 
वर्तमान संकट को पार कर लेंगे। निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। संभवत इसी
लिए यह अनुमान है कि जनता पार्टी के अध्यक्ष देश के नए प्रधानमंत्री श्री देसाई भी महंगाई को 
घटाने का प्रयास करेंगे। तेलों की सहानुभूति में वनस्पति के भाव भी लगभग 4 रुपए प्रति टीन घटकर 
151 से 152.25 रुपए प्रति टीन रह गए। 
	जनता पार्टी के नेताओं में आपसी मतभेद की खबरों के चलते बाजार में अनिश्चितता थी। ..रिपोर्ट 
खत्म।	

4- 1978-1987 की अवधि

सुधरता मूंग, उछलता काबुली चना
दशकों के बावजूद मंडी रिपोर्टिंग की भाषा कमोबेश वैसी ही रही। 
देखें-

दैनिक हिन्दुस्तान, 21 दिसम्बर 1978, पेज नंबर सात
दो कालम की खबर 
	अनाज व दालें
उड़द, मोठ, मूंग सुधरे-काबली चने में भारी तेजी 
दिल्ली -20 दिसं (एनएनएस) राजस्थान में फसल कमजोर होने की आशंका से तथा आवक घटने के कारण 
उड़द, मोठ के भाव 2 /10 रुपये बढ़ गये। स्टाक के अभाव में काबुली चना 25/50 रु. उछलते सुना गया
। 
उत्तर प्रदेश में नये माल की आवक बढ़ने से चावलों में पूर्वस्तर की मजबूती रही। बाजरा व मक्की के भा
व मांग के अभाव में 1 /2 रुपये ढीले रहे। मसूर व अरहर में भी दाल मिलों की लिवाली से 5-5 रुपये 
का लाभ हुआ। भाव प्रति क्विंटल-
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alok puranik contd....

सर्राफा बाजार 
चांदी, सोना स्टे. दोनों में तेजी 
दिल्ली , 20 दिसंबर, (एन.एन.एस.)न्यूयार्क के तेज समाचार से चाँदी तेजाबी 4 रु बढ़ गई। सोने में 
भी 1 /5 रुपये की तेजी आई। 
बम्बई के तेज समाचार से सोना स्टैंडर्ड 7 रु. प्रति दस ग्राम बढ़ाकर बोला गया। विटूर में भी इसकी 
देखा-देखी एक रुपये का लाभ हुआ। ...............रिपोर्ट खत्म।

क्रिकेट, तस्कर और वाघा बोर्डर 
क्रिकेट का असर भारतवर्ष में कई बातों पर पड़ता है। 
दफ्तरों की हाजिरी से लेकर सड़क के ट्रेफिक तक पर क्रिकेट अपना असर डालता है। क्रिकेट भारत में 
खेल नहीं, धर्म है-मतलब यह जुमला भी इतना पुराना है, जितना पुराना भारत में क्रिकेट है। पर
 क्रिकेट का असर सोना-चांदी के भावों पर पड़ता था, यह जानना खासा दिलचस्प है। यह उस दौर
 की बात है, जब सोने-चांदी के भावों पर तस्करी का असर खासा होता था। तो पूरा सिलसिला यूं 
बनता है कि क्रिकेट का असर तस्करी पर पड़ता था, और तस्करी का असर भावों पर पड़ता था, तो 
संक्षेप में यह कहें कि क्रिकेट सोना-चांदी के भावों को प्रभावित करता हुई दीखता था। 
है ना आश्चर्यजनक किंतु सत्य कोटि का तथ्य। देखें-
हिन्दुस्तान 11 दिसंबर, 1982 पेज नंबर सात
दो कालम
सराफा बाजार
सटोरियों व तस्करों से चांदी पुन 39 रु. ऊंची, सोना बढ़ा
दिल्ली -10 दिसम्बर, (एनएनएस) स्थानीय सटोरियों व पंजाब के कथित तस्करों की भारी लिवाली
 की चर्चा से चाँदी, तेजाबी डिलीवरी पुन 39 रु. ऊंची हो गई। सोना विटूर भी 10 रु. बढ़ते सुना 
गया। 
लाहौर में हो रहे क्रिकेट मैच के उपलक्ष्य में पाकिस्तान सरकार द्वारा वाघा बार्डर को 12 घंटे के
 लिए खोल दिये जाने से पाकिस्तान की चांदी के तस्कर निर्यात में वृद्धि की चर्चा सुनी जा रही थी
। न्यूयार्क में भी इसके भाव 10 सेंट प्रति औंस बढने की खबर थी, जिससे चांदी तेजाबी डिलीवरी 
2806 से बढ़कर 2845 रु.  प्रति किलो हो गयी। .................रिपोर्ट खत्म। 


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