[दीवान]थोथी संवेदना की उल्टी बंद कीजिए मित्रो

reyaz-ul-haque beingred at gmail.com
Sat Nov 3 00:10:57 IST 2007


थोथी संवेदना की उल्टी बंद कीजिए
मित्रो<http://hashiya.blogspot.com/2007/11/blog-post.html>

आज ऐश्वर्य राय के 34 वें जन्मदिन की खुमारी में डूबे मीडिया के लिए एक खबर
मानो उसका जायका खराब करने के लिए आयी. खबर चूंकि पत्रकारों से ही जुडी़ थी, सो
मजबूरी थी, वरना उसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता था. बिहार के एक एक विधायक ने कुछ
पत्रकारों की पिटाई कर दी है. यह नवधनाढ्य विधायक राज्य में आतंक का एक पर्याय
सा बन गया है-और इसके बावजूद मुख्यमंत्री का खासमखास माना जाता है. यह कांड एक
रेशमा नाम की एक युवती की हत्या के सिलसिले में विधायक का पक्ष जानने के लिए
गये पत्रकारों के साथ हुआ.
अब इस पर हाय-हाय ज़ारी है.
मगर यह घटना अजीब नहीं है. समाज के हिस्से में यह आश्वस्ति गहरे तक पैठी हुई है
कि वह कुछ भी करे, किसी भी तरह से पेश आये-उसे कुछ नहीं होगा. पूंजीपतियों के
अलावा नव धनिक, राजनीतिक दलों के नेता, जातियों के क्षत्रप और प्रशासन से जुडे़
लोग इसमें शामिल हैं. जाहिर है-यह इस तंत्र द्वारा ही दी गयी छूट है और यह किसी
कमजोरी के कारण नहीं है. बल्कि इस तंत्र की अनिवार्य परिणति इसी में होनी
थी-होनी है.
और मीडिया इसमें इसका सहयोगी है-यह इस तंत्र का चौथा खंभा है. इसलिए
मीडियाकर्मियों को इस पर नैतिकता की, लोकतंत्र की, आज़ादी की (अभिव्यक्ति की
आज़ादी सहित) और अपने विशेषाधिकार की दुहाई देने का कोई अधिकार नहीं है. वे सब
उसमें लिप्त हैं. बेशक, मैं समूचे पत्रकारिता जगत की बात नहीं कर रहा-कई हैं जो
रोशनी की मीनार की तरह हैं-मगर पत्रकारिता पर वे हावी नहीं हैं. मैं उनकी बात
कर रहा हूं जो हावी हैं. और वे वही हैं-जो ऐसे नेताओं की दलाली से लेकर उनके
साथ कमीशन में हिस्सा तक बंटाते हैं. लगभग पूरा मीडिया जगत सरकार और प्रशासन का
भोंपू बन गया है. सरकार बयान ज़ारी करती है और उसे देश की एक अरब जनता की राय
मान लिया जाता है. पुलिस खबर प्लांट करती है और किसी को भी खतरनाक
आतंकवादी-उग्रवादी-जनद्रोही मान लिया जाता है. ऐसा कौन करता है? अपने लिए आज़ादी
और लोकतंत्र का अधिकार चाहने वाले पत्रकार यह मानते हैं कि नहीं कि देश के उन
लाखों लोगों को भी उन्हीं अधिकारों की मांग करने का अधिकार है? उनमें से कितने
हैं-जो वास्तव में जनता का पक्ष लेकर लिखते-बोलते हैं? उनमें से कितने हैं जो
जनता की लडा़इयों को समझते-बूझते हैं, उनसे हमदर्दी रखते हैं? उनमें से कितने
हैं जो समस्याओं की जड़ तक पहुंचने की कोशिश करते हैं-सतही और सनसनीखेज विवरणों
से नफ़रत करते हैं?
इस घटना को लेकर भी जो सवाल उठाये जा रहे हैं-वे बहुत कुछ अगंभीर किस्म के हैं.
और इसे सिर्फ़ बिहार से जोड़ कर देखा जा रहा है. हालत यह है कि कोई भी असली सवाल
उठाना नहीं चाहता-वे सवाल, जिनसे शासक वर्ग को असहजता महसूस हो. हां वे सवाल
करते हैं, और खूब करते हैं, मगर उसी तरह के जैसे कि मदारी अपने जंबूरे से करता
है-तमाशा खत्म न हो और रोचकता बनी रहे. एक तमाशा है जो चल रहा है.
और ऐसे में जब एक विधायक कुछ पत्रकारों को पीट देता है तो इसमें अजीब क्या है.
क्या आप कह सकते हैं कि उसने कितनों की हत्याएं की होंगीं? इसके पहले गुमनाम
हत्याएं हुईं. कई पिटाए होंगे. आप आज पिटा गये तो कह रहे हैं कि यह गुंडा है.
नहीं पिटाते तो आपमें से ही कई, उसी विधायक के डाइनिंग हाल में बैठ कर चाय पीते
और लिफ़ाफ़े लेते.
जिस युवती की हत्या का मामला था, उसने कुछ दिन पहले एक चिट्ठी लिखी-सारे
अखबारों और प्रशासन को, मुख्यमंत्री सहित. और उसकी हत्या कर ही दी गयी. कितने
अखबारों ने उस पत्र की नोटिस ली? कितनों ने उसके बारे में एक भी लाइन छापा?
चैनलों ने कितने सेकेंड उस पर दिये?
...और अंत में वह मार डाली गयी.
थोथी संवेदना, सतही हैरतंगेजपन और निरर्थक सवालों की उल्टी बंद कीजिए मित्रो.
आपने पूरे स्पेस को घृणित बदबू से भर दिया है. कम से कम आज के दिन ही सही, सही
सवालों के साथ सही नज़रिये से देखना, सोचना, बोलना शुरू कीजिए. वरना एक दिन, हम
आपकी ऐसी पिटाइयों पर संवेदना जतानेवाला भी कोई नहीं रहेगा.

प्रस्तुत है रेशमा का पत्र. इसकी भाषा, त्रुटियों के बावजूद ज्यों की त्यों रखी
गयी है.

माननीय मुख्यमंत्री, बिहार
महाशय
आपके सुशासन में भी आप ही के पार्टी के जदयु विधायक अनंत कुमार सिंह, बिल्डर
मुकेश सिंह एवं सुरक्षा गार्ड विपिन सिंह द्वारा मेरा बलात्कार हुआ एवं मुझे
रोज जान से मार डालने की धमकी दी जा रही है.
बिल्डर मुकेश सिंह के पास नौकरी के सिलसिले के लिए गयी थी. पहले मुकेश सिंह
नौकरी दिलाने के नाम पर मेरा बलात्कार किया. बिल्डर मुकेश सिंह, विधायक अनंत
सिंह का एक मकान बंदर बगीचा के पास बनवा रहे थे. वहीं पर उस मकान का मैनेजर
बनाने का लोभ दे कर मेरे साथ बलात्कार किये. फिर विधायक अनंत सिंह के सरकारी
डेरा पर ले जाकर नौकरी के बहाने विधायक जी भी मेरा दो बार बलात्कार किये. उसके
बाद उनका अंगरक्षक विपिन सिंह दूसरे कमरे में ले जाकर बलात्कार किया. उसके बाद
यह प्रक्रिया लगातार चलती रही. बात गोपनीय रखने के लिए मुझे जान से मार डालने
के लिए धमकी दी गयी है.
दिनांक 10.10.07 को सुबह 9.00 बजे मुकेश सिंह मुझे लेकर विधायक अनंत सिंह के
पास फिर नौकरी का बहाना ले कर गये. विधायक अनंत सिंह एवं मुकेश सिंह उनके कसरत
करनेवाले मशीन के रूम के बगल के रूम में ले गये थे. वहां ले जाकर पलंग पर से
चादर उठाया. पूरे पलंग पर नोटों की गड्डी थी. अनंत सिंह बोले, जितना रुपया लेबे
के हो तो ला. बदले में एक स्थानीय विधान पार्षद एवं उनके भाई पर तोरा रेप केस
करे परतो, नहीं त तोरा जान मार देबऊ.
दो दीन का समय ले कर किसी तरह वहां से निकल गये.
अब लगता है अनंत सिंह एवं मुकेश सिंह तथा विपिन सिंह किसी भी समय मुझे मार
देंगे. हो सकता है कि मेरा पत्र आपके पास पहुंचते-पहुंचते मारी ही जाऊं. अगर
मैं मारी गयी तो मुख्यमंत्री जी आपको अपने बेटे की कसम है, मेरे तीनों हत्यारों
अनंत सिंह, मुकेश सिंह एवं विपिन सिंह को सख्त से सख्त सजा दिलवायेंगे. अनंत
सिंह आपको भी बहुत गाली देता है.
आपकी विश्वासभाजन
अभागी रेशमा

प्रतिलिपि : राबड़ी देवी, एडीजी अभयानंद, आइजी-पटना, डीआइजी-पटना, वरीय आरक्षी
अधीक्षक -पटना, आजतक न्यूज चैनल, एनडीटीवी, सहारा न्यूज, जी न्यूज, हिंदुस्तान
दैनिक, जागरण, आज, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स.
सभी पत्रकार बंधुओं से एक अभागीन बहन का निवेदन है. अगर मेरी हत्या हो जाती है
तो मेरी हत्या के जिम्मेदार विधायक अनंत सिंह एवं सुरक्षा गार्ड विपिन सिंह को
फांसी पर जरूर लटकाइयेगा.


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REYAZ-UL-HAQUE______________________________
prabhat khabar, old bypass road, kankarbagh, patna-20
Ph - 0612234881
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