[दीवान]रात के विरुद्ध, प्रात के लिए...

reyaz-ul-haque beingred at gmail.com
Fri Nov 9 01:03:12 IST 2007


 रात के विरुद्ध, प्रात के
लिए...<http://hashiya.blogspot.com/2007/11/blog-post_09.html>

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आपको अपने बचपन की दीपावली याद है? आपने अपने पास-पड़ोस के कुम्हारों को सिर पर
हाथ रखे यों दीपावली को बीत जाते कब देखा था?
इस दीपावली पर, पिछले कुछ सालों की ही तरह बाजार में सस्ते और प्राय: विदेशी
खिलौनों, मूर्तियों की भरमार है. और कहने की जरूरत नहीं है कि इसने देश के उन
लाखों लोगों के धंधों को चौपट कर दिया है, जो उनकी आजीविका के साधन थे.
और यह सिर्फ दीपावली की बात नहीं है.
बाजार ने हमारे लिए पर्व-त्योहारों के जो नये अर्थ दिये हैं, उनमें मनुष्य और
उसकी गरिमा कहीं नहीं है. बाजार जिस उत्सव में शामिल है, वह सिर्फ मुनाफे का
उत्सव है. अगर आप इसे दूसरे शब्दों में देखना चाहें तो कुछ आंकड़ों पर गौर
करें. पिछले एक साल में देश भर में 22 करोड़ लीटर शराब पी गयी है. डांस, बार और
पबों में एक हजार से 50 हजार रुपये तक एक आदमी द्वारा खर्च कर दिये जाते हैं-
सिर्फ एक घंटे की मौज-मस्ती पर. अनेक महानगरों में नाइट क्लबों में प्रवेश की
फीस 10 हजार रुपये तक है. फाइव स्टार पार्टियों में हरेक व्यक्ति पर तीन से 10
हजार तक का खर्च आता है. देश का लॉटरी बाजार 250 अरब रुपये का है. भारत में जुए
का बाज़ार 500 अरब रुपये का और विलासिता की सामग्री का बाजार 64,000 करोड़ रुपये
का है.
दूसरी ओर देश की बहुसंख्यक आबादी घोर विपन्नता और गरीबी के अंधकार में जी रही
है. सीमांत पर जी रहे ये करोड़ों लोग उत्सव में शामिल तो हैं, पर उनके पास इसका
कोई उल्लास अब नहीं बचा रह गया है. इससे व्यापक आबादी में क्षोभ और काफी हद तक
हताशा भी पैदा हुई है.
देश में बड़ी मात्रा में आ रही वित्तीय पूंजी ने, कारपोरेट चालित मीडिया ने और
लगातार घटते अवसरों ने यह मानस गढ़ने की कोशिश की है कि अब सट्टे के जरिये,
लॉटरी और ऐसे ही तमाम हथकंडों के जरिये अमीर बना जा सकता है या बना जाना ही
चाहिए. यह लोगों को एक लंबी और अंधी सुरंग में दाखिल कर देने जैसा है.
इसलिए दीपावली की खुशियां ज्यादा रोशनी से भरी हों, जिंदगी की राहों में और
अधिक उजाला हो और हमारे दिन अपने उल्लास से भरे-पूरे हों-इसके लिए बाजार के
गणित और उसके मुनाफे के चक्रव्यूह से अपने त्योहारों को निकालने की कोशिश हो.
आइए, इस दीपावली में हम वे दीप रोशन करें जो रात से इस लड़ाई में सवेरा होने तक
हमारा साथ दें.
आप सबको दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं.


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REYAZ-UL-HAQUE______________________________
prabhat khabar, old bypass road, kankarbagh, patna-20
Ph - 0612234881
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