[दीवान] anyatha - jhuggi jhopri visheshank
Ravikant
ravikant at sarai.net
Thu Nov 15 13:08:03 IST 2007
दीवान के पाठक अन्यथा नाम की पत्रिका से पहले मिल चुके हैं. 'भारतीय-अमरीकी मित्रों का
साहित्यिक प्रयास', यह पत्रिका लुधियाना से निकलती है, कृष्ण किशोर के संपादन में.
इसने पहले भी विश्व साहित्य पर कुछ अच्छे अंक निकाले हैं. इसका ताज़ा अंक बनती-मिटती, जलती
बुझती झोपड़पट्टियों पर केन्द्रित है, कुछ माल विश्व साहित्य से है, कुछ हिन्दी साहित्य से. सराय
के लिए तोष की बात है कि दो आलोचनात्मक लेखों(अनामिका, डॉ. रोहिणी अग्रवाल) में बहुरूपिया
शहर नामक सायबर-मोहल्ला की हालिया किताब को केन्द्र में रखकर तर्क का ताना-बाना बुना गया
है. शहराती साहित्य के इस पहलू में दिलचस्पी रखनेवाले के लिए ज़रूरी संदर्भ:
आमुख यहाँ है:
http://www.anyatha.com
अनामिका यहाँ
http://www.anyatha.com/Anamika(10th)1.htm
और रोहिणी जी का लेख:
http://www.anyatha.com/RohiniAggarwal(10th)1.htm
मज़े लें.
रविकान्त
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