[दीवान] mahesh bhatt on English in Hindi cinema
Ravikant
ravikant at sarai.net
Tue May 27 18:44:26 IST 2008
shayad kuchh logon ko is khabar mein dilchaspi ho.
http://hindimedia.in se sabhar
cheers
ravikant
फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट के व्यक्तित्व में कई विरोधाभास हैं और अलग-अलग मंचों पर उनके
व्यक्तित्व के अलग-अलग रूप भी सामने आते हैं, और कई बार तो वे एक मंच से कही गई अपनी एक बात
का दूसरे मंच पर खंडन करते नजर आते हैं। लेकिन इसके बावजूद इस बात को मानना पडे़गा कि जो भी
कहते हैं उसकी पूरी जिम्मेदारी भी अपने ऊपर लेते हैं। महाराष्ट्र राज्य हिन्दी अकादेमी द्वारा मुंबई
में भारतीय भाषाओं के भविष्य पर आयोजित परिसंवाद में महेश भट्ट भी आए थे और कार्यक्रम के सूत्रधा
र जाने माने पत्रकार और चिंतक और हिन्दी के प्रति समर्पित श्री राहुल देव ने महेश भट्ट से जब
कहा कि वे हिन्दी फिल्म उद्योग के लोगों द्वारा हिन्दी फिल्मों की रोटी खाने के बावजूद हर
जगह अपनी बात अंग्रेजी में कहने को लेकर कुछ कहें, तो इस पर महेश भट्ट ने जो कुछ कहा वह चौंकाने
वाला था। और यह भी मानना पड़ेगा कि फिल्म उद्योग में ऐसी बात कहने की गुस्ताखी महेश
भट्ट जैसी व्यक्ति ही कर सकता है।
महेश भट्ट ने कहा कि ग्लोबलाईज़ेशन के इस दौर में इस बात को समझना जरुरी है कि हम गुलाम बनने
की एक ऐसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं जो हमारे अंदर अपनी माँ को भी गिरवी रखने का सोच पैदा
करती है। उन्होंने कहा कि हमारा सिनेमा जड़हीन होता जा रहा है, इसकी कोई जड़ें नहीं है, और न
कोई गहराई है। उन्होंने कहा कि फिल्मी और टीवी दुनिया से जुड़ा हर सितारा न्यूयॉर्क टाईम्स में
अपनी खबर और फोटो देखना चाहता है जबकि उसको नाम और पैसा हिन्दी के दर्शकों से मिलता है।
आज हर सितारा अपनी शख्सियत और अपनी पहचान अंग्रेजी में बनाना चाहता है, आज फिल्म उद्योग में
हिन्दी न जानना और गलत हिन्दी बोलना सम्मान की बात हो गई है। महेश भट्ट ने कहा कि इस
अंग्रेजी मानसिकता से पूरा देश आज एक बार फिर गुलाम होता जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक छोटे से देश आईसलैंड ने माईक्रोसॉप्ट जैसी कंपनी के कंप्यूटर
ऑप्रेटिंग सिस्टम को इसलिए स्वीकार नहीं किया कि वह उनकी भाषा में नहीं था और माईक्रोसॉफ्ट
को कुछ ही महीनों में उस देश के लिए उनकी भाषा में ऑप्रेटिंग सिस्टम बनाना पड़ा। हमारे देश भारत
में आज तक किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि कंप्यूटर पर हिन्दी में कामकाज की सुविधा क्यों
नहीं मिल पाई। महेश भट्ट ने कहा कि हिंदी फिल्मों के जिन सितारों की निगाहें लास एंजिलिस लगी
रहती हैं वे हिंदी कैसे बोल सकते हैं? प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट ने कहा कि आज की
स्थिति बहुत ही खतरनाक है। हर काम अंग्रेज़ी में हो रहा है। हम अंग्रेज़ी बोलने में गर्व महसूस करते
हैं। लेकिन भाषा की सांस्कृतिक गहराई को नहीं समझ पा रहे हैं। भाषा हमारी माँ है और प्रगति के
लिए आज हमें अपनी माँ को ही गिरवी रखना पड़ रहा है। चीन ने अगर अपनी भाषा में तरक्की की है
और आइसलैंड जैसे देश ने अपनी भाषा के लिए माइक्रोसाफ्ट के अंगरेज़ी साफ्टवेयर को खरीदने से मना कर
दिया तो क्या हम ऐसा नहीं कर सकते। हमें अपनी भाषा की रक्षा हर कीमत पर करनी चाहिये,
क्योंकि यह हमारी अस्मिता, हमारे वजूद से जुड़ा सवाल है।
श्री राहुल देव के आग्रह पर श्री भट्ट ने कहा कि वे इस सम्मेलन में मौजूद सभी विद्वानों और विचा
रकों की बात फिल्मी दुनिया के सितारों, निर्माताओं और निर्देशकों तक पहुँचाएंगे।
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