[दीवान]वेब गर्ल की नयी आजादी

Rakesh Kumar Singh rakesh at sarai.net
Sun Jan 18 12:43:13 IST 2009


सविताभाभी.कॉम से मिलते-जुलते ऑफलाइन सामग्रियों पर एक शोध अभय कुमार दुबे जी ने किया 
था जो बाद में 'दीवान-ए-सराय' में भी छपा था. रविकान्त जी वाली सलाह को ही  और 
आगे बढाते हुए  मेरी ये गुजारिश है कि ऑनलाइन पॉर्न सामग्रियों पर किया जाने वाला कोई 
भी काम सेक्शुअल्टी के सवाल पर संभवत: कोई नया नज़रिया दे सकेगा.

मेरे ख़याल से ऐसे अध्ययनों की सख़्त दरकार है.

राकेश

Ravikant wrote:

>पर विजेन्द्र जी,
>
>देखिए कि नया लैपटॉप लेने के बाद ये पीएचडी का शोधार्थी कितना ज़्यादा प्रोडक्टिव हो गया है. 
>और सविता भाभी भी उसके शोध का हिस्सा माना जाए. क्या ख़याल है? 
>
>रविकान्त
>
>शनिवार 17 जनवरी 2009 16:42 को, Vijender chauhan ने लिखा था:
>  
>
>>विनीत,
>>
>>हमारे मनाने से क्‍या होता है...हम तो ये भी मनाते हैं कि नया नया लैपटाप लिए
>>पीएचडी के शोधार्थी सविताभाभी के द्वारे जाने के स्‍थान पर शोध पर घ्‍यान दें।
>>...कुछ होता हे हमारे मनाने से :))
>>
>>विजेंद्र
>>
>>
>>
>>2009/1/17 vineet kumar <vineetdu at gmail.com>
>>
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